भोपाल। राजधानी भोपाल के ऐशबाग थाना क्षेत्र स्थित सुदामा नगर में सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी हेमंत बारिक और उनकी पत्नी शकुंतला बारिक की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी 60 घंटे बाद भी नहीं सुलझ सकी है। ब्लाइंड मर्डर बने इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की 10 विशेष टीमें लगातार जांच में जुटी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिन्होंने पुलिस की जांच को और भी पेचीदा बना दिया है। सबसे बड़ा सवाल मृतक हेमंत बारिक की मोबाइल और सिम बदलने की आदत को लेकर खड़ा हो गया है।
हर तीन महीने में बदलते थे मोबाइल और सिम
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि हेमंत बारिक लगभग हर तीन महीने में अपना मोबाइल फोन और सिम कार्ड बदल लिया करते थे। जब पुलिस ने उनके घर की तलाशी ली तो वहां से करीब 10 पुराने और क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन बरामद हुए। आखिर वे इतनी बार मोबाइल और सिम क्यों बदलते थे, इसका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है।
पुलिस की एक विशेष टीम अब इसी मोबाइल मिस्ट्री को जांच का अहम आधार मानकर पड़ताल कर रही है।
चार गोलियां चलीं, चारों लगीं निशाने पर
फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि हमलावर ने कुल चार गोलियां चलाई थीं। इनमें से दो गोलियां हेमंत बारिक और दो गोलियां शकुंतला बारिक के शरीर में मिली हैं। घटनास्थल से अन्य किसी फायरिंग के साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देकर फरार हुआ।
जेवर और नकदी छोड़ी, लेकिन मोबाइल ले गया आरोपी
पूरे घटनाक्रम का सबसे रहस्यमय पहलू यह है कि घर में रखी नकदी और जेवरात पूरी तरह सुरक्षित मिले, लेकिन आरोपी दंपती के मोबाइल फोन अपने साथ ले गया। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद दोनों मोबाइल फोन घर के भीतर ही बंद किए गए थे और उनकी अंतिम लोकेशन भी घर के अंदर की ही मिली है। इसके बाद आरोपी उन्हें साथ लेकर बाहर निकला होगा।
इससे पुलिस को आशंका है कि हत्याकांड की असली वजह मोबाइल फोन में मौजूद कोई महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है।
गायब मोबाइल बन सकते हैं सबसे बड़ा सुराग
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि दंपती के गायब मोबाइल फोन इस पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में सबसे अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। घर से बरामद पुराने मोबाइलों की भी तकनीकी जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनमें कोई महत्वपूर्ण डेटा मौजूद था या नहीं।
कॉल डिटेल में नहीं मिला कोई संदिग्ध संपर्क
ऐशबाग थाना प्रभारी संदीप पवार के अनुसार, अब तक की जांच में दंपती की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) में कोई संदिग्ध नंबर सामने नहीं आया है। दोनों की बातचीत मुख्य रूप से अपने रिश्तेदारों और परिचितों तक ही सीमित थी। ऐसे में पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल डेटा, फॉरेंसिक रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हत्यारे तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
हर पहलू पर जांच, लेकिन रहस्य बरकरार
फिलहाल यह मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर बना हुआ है। पुलिस मोबाइल फोन की गुमशुदगी, बार-बार सिम बदलने की वजह, पुराने मोबाइलों की जांच और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, 60 घंटे बीत जाने के बावजूद हत्यारे का कोई ठोस सुराग न मिलना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
