स्टांपिंग के नाम पर वसूली का खेल! नापतौल निरीक्षक 27,500 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

 



ग्वालियर/भिंड। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के तमाम दावों के बावजूद रिश्वतखोरी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी दफ्तरों में काम कराने के लिए आम नागरिकों और कारोबारियों से खुलेआम घूस मांगने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला भिंड जिले से जुड़ा है, जहां पेट्रोल पंप की स्टांपिंग के नाम पर रिश्वत मांगने वाले नापतौल निरीक्षक को ग्वालियर लोकायुक्त ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजनलाल शर्मा के अनुसार भिंड जिले के ग्राम पुर निवासी पेट्रोल पंप संचालक तेजनारायण सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि नापतौल निरीक्षक सौरभ शर्मा स्टांपिंग की प्रक्रिया पूरी करने के बदले 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है।

शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोप सही पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी निरीक्षक पहले ही 22 हजार 500 रुपये की पहली किश्त वसूल चुका था और शेष 27 हजार 500 रुपये लेने के लिए लगातार दबाव बना रहा था।

लोकायुक्त ने बिछाया जाल, दफ्तर में ही दबोचा



शिकायत की पुष्टि होने के बाद ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की। आरोपी ने आवेदक को ग्वालियर स्थित अपने कार्यालय बुलाया था। जैसे ही सौरभ शर्मा ने शेष 27 हजार 500 रुपये की रिश्वत राशि हाथ में ली, पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। अचानक हुई गिरफ्तारी से विभाग के कर्मचारियों में भी खलबली मच गई।

सवालों के घेरे में व्यवस्था

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों पर नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी है, वही नियमों को ताक पर रखकर रिश्वतखोरी में लिप्त पाए जा रहे हैं। पेट्रोल पंप की स्टांपिंग जैसी नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए भी यदि कारोबारियों को रिश्वत देनी पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।


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