निर्जला एकादशी का पद्म पुराण में बहुत विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत भीमसेन ने भी किया था, इसीलिए इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत करने से पूरे साल में पड़ने वाली सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में विधिपूर्वक और पूरी श्रद्धा के साथ यह व्रत करना चाहिए। धर्म शास्त्रों और पद्मपुराण में द्वादशी के दिन एकादशी व्रत का पारण करने का विधान बताया गया है। इस दिन विधिपूर्वक विष्णुजी की पूजा के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। ऐसा करने से उत्तम फल प्राप्त होता है। ऐसे में आइए पंडित राकेश झा से विस्तार से जानें निर्जला एकादशी व्रत पारण का समय और पद्मपुराण से व्रत खोलने की संपूर्ण विधि।
निर्जला एकादशी व्रत खोलने का समय
धर्मशास्त्रों और पद्मपुराण के अनुसार, निर्जला एकादशी के व्रत का पारण मनुष्य को द्वादशी के दिन ही करना चाहिए। ऐसा करने से उत्तम फल प्राप्त होता है। ऐसे में इस एकादशी व्रत का पारण 26 जून, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन सुबह के 5 बजकर 41 मिनट से लेकर 8 बजकर 25 मिनट का समय व्रत खोलने के लिए सबसे उत्तम रहेगा।
निर्जला एकादशी व्रत पारण विधि पद्म पुराण में वर्णित
पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन सुबह विष्णुजी की पूजा करने के बाद पूरे दिन बिना पानी पिए व्रत रखा जाता है। इसके बाद, अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करने का विधान होता है। ऐसे में 26 जून को विधिपूर्वक व्रत खोलना चाहिए।
द्वादशी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद, भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
पद्म पुराण के अनुसार, गंध, धूप, पुष्प और सुंदर वस्त्र के साथ विष्णुजी का पूजन करें। साथ ही, जल के घड़े का संकल्प करना चाहिए।
जल का घड़ा दान के लिए पहले ही लेकर रख लेना चाहिए। फिर, द्वादशी पर जल के घड़े का संकल्प करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें-
'देवदेव हषीकेश संसारार्णवतारक, उदकुम्भप्रदानेन नय मां परमां गतिम्।' अथार्त 'संसार सागर से तारने वाले देवदेव हृषीकेश। इस जल के घड़े का दान करने से आप मुझे परम गति की प्राप्ति कराइए।'
द्वादशी तिथि के दिन व्रती को पूजन के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इसके पश्चात ही स्वंय भोजन करें। मान्यता है कि व्रत का पारण सबसे पहले जल और तुलसी दल के साथ करना चाहिए।
पद्म पुराण के मुताबिक, जो मनुष्य इस विधि से निर्जला एकादशी का व्रत करता है। वह सभी पापों से मुक्त हो सकता है। साथ ही, जीवन में सुख-समृद्धि और भगवान विष्णुजी की कृपा प्राप्त होती है।
