जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक प्रकरण में निरुद्ध जबलपुर निवासी एक युवक के मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण में कथित लापरवाही को गंभीरता से लिया है।
अगली सुनवाई सात जुलाई को होगी
जेल प्रशासन को सख्त निर्देश दिया है कि बंदी को एक जुलाई, 2026 से पहले हर हाल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल ले जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परीक्षण कराया जाए तथा इसकी अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई सात जुलाई को होगी।
अधिवक्ता मनोज चतुर्वेदी ने पक्ष रखा
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता युवक की ओर से अधिवक्ता मनोज चतुर्वेदी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि बंदी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। न्यायालय के पूर्व निर्देश पर उसे एम्स भोपाल ले जाया गया था, जहां विशेषज्ञों ने पुनः परीक्षण के लिए बुलाया था।
समय-सीमा के भीतर चिकित्सकीय परीक्षण सुनिश्चित करें
जेल प्रशासन ने पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए दोबारा एम्स नहीं भेजा। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था या पुलिस बल की कमी किसी बंदी के उपचार में बाधा नहीं बन सकती। इसलिए आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराकर समय-सीमा के भीतर चिकित्सकीय परीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
समुचित उपचार नहीं मिलने और खराब स्वास्थ्य
उल्लेखनीय है कि जबलपुर के उस युवक ने समुचित उपचार नहीं मिलने और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत की अपील दायर की है। मामले में भारत सरकार की ओर से अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने पक्ष रखा। कोर्ट ने जेल अधिकारियों को एक जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए प्रकरण को सात जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है।
