जबलपुर। पाटन विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नीची की महिलाओं ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में गांव में कथित रूप से हो रही अवैध शराब बिक्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। महिलाओं ने पुलिस प्रशासन से गांव में संचालित शराब के अवैध कारोबार पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि शराब की वजह से परिवार टूट रहे हैं और बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ता जा रहा है।
पड़ोसी गांव की उपसरपंच एवं समाजसेवी डॉ. सीता साहू के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक महिलाएं अपने बच्चों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए गांव की स्थिति से अवगत कराया और सख्त कार्रवाई की मांग की।
‘लाड़ली बहना की राशि भी नहीं चाहिए, लेकिन शराब बंद हो’
जनसुनवाई में पहुंची महिलाओं का कहना था कि गांव में शराब का दुष्प्रभाव इतना बढ़ गया है कि यदि सरकार की लाड़ली बहना योजना की राशि भी बंद करनी पड़े तो उन्हें स्वीकार है, लेकिन गांव में शराब की बिक्री हर हाल में बंद कराई जानी चाहिए। महिलाओं ने कहा कि आर्थिक सहायता से अधिक जरूरी उनके परिवारों और बच्चों का सुरक्षित भविष्य है।
स्कूल के सामने बिक रही शराब, बच्चे हो रहे प्रभावित
महिलाओं ने आरोप लगाया कि ग्राम नीची में बड़े पैमाने पर अवैध शराब बेची जा रही है। स्थिति यह है कि स्कूल के सामने तक शराब उपलब्ध हो रही है, जिससे बच्चे भी गलत माहौल के संपर्क में आ रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं ने इसे सामाजिक और शैक्षणिक वातावरण के लिए गंभीर खतरा बताया।
नशे में घर लौटकर करते हैं मारपीट
शिकायत में महिलाओं ने बताया कि गांव के कई पुरुष शराब की लत के शिकार हो चुके हैं। नशे की हालत में घर पहुंचने के बाद वे महिलाओं के साथ मारपीट और विवाद करते हैं, जिससे परिवारों में तनाव का माहौल बना रहता है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है।
एक व्यक्ति पर लगाया अवैध शराब बिक्री का आरोप
महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में मनोज चादर नामक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से शराब का कारोबार किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की।
इन महिलाओं ने की शिकायत
ज्ञापन सौंपने वालों में दिशा गौड़, पुष्पा रैकवार, पूजा गौड़, सपना, शिवानी अख्तर, पूजा, भावना, प्रीमा भारती, निशा, माया, गीता सहित अन्य ग्रामीण महिलाएं शामिल थीं।
महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे गांव की अन्य महिलाओं को साथ लेकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगी।
