चार लाख से अधिक लंबित मामलों के बीच न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती, केंद्र की मंजूरी के बाद होगी औपचारिक नियुक्ति
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने वरिष्ठ अधिवक्ता अमित लाहोटी के नाम की न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिए अनुशंसा की है। अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। केंद्र की मंजूरी और राष्ट्रपति की अधिसूचना जारी होने के बाद उनकी नियुक्ति प्रभावी होगी तथा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।
न्यायिक क्षेत्र में इस सिफारिश को सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित मामलों के बढ़ते दबाव के बीच नई नियुक्तियों को न्यायिक व्यवस्था के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक नए न्यायाधीश की नियुक्ति से मामलों के निस्तारण में तेजी आती है और विभिन्न श्रेणी के प्रकरणों की सुनवाई अधिक प्रभावी ढंग से हो पाती है।
हाई कोर्ट के प्रमुख अधिवक्ताओं में शामिल हैं अमित लाहोटी
अमित लाहोटी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में गिने जाते हैं। संवैधानिक, दीवानी और प्रशासनिक मामलों में उनकी विशेष पकड़ मानी जाती है। लंबे समय से उच्च न्यायालय में सक्रिय वकालत करते हुए उन्होंने विधिक क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान स्थापित की है। उनकी पेशेवर दक्षता और न्यायिक समझ को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम पर सहमति जताई है।
चार लाख से अधिक लंबित मामलों का दबाव
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, जिसकी प्रधान पीठ जबलपुर में तथा खंडपीठें इंदौर और ग्वालियर में स्थित हैं, वर्तमान में चार लाख से अधिक लंबित मामलों के बोझ से जूझ रहा है। इनमें दीवानी, फौजदारी, सेवा, राजस्व और संवैधानिक मामलों की बड़ी संख्या शामिल है। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि रिक्त पदों को शीघ्र भरना न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए बेहद जरूरी है।
53 स्वीकृत पदों में हर नियुक्ति अहम
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं। हालांकि सेवानिवृत्ति, स्थानांतरण और नई नियुक्तियों के कारण कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या समय-समय पर बदलती रहती है। ऐसे में हर नई नियुक्ति न्यायिक तंत्र को मजबूती प्रदान करती है और मामलों के त्वरित निपटारे में मददगार साबित होती है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस विवेक रूसिया
इधर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया ने मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) का पदभार ग्रहण कर लिया। राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली। स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तक वे इस पद पर कार्य करेंगे।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद केंद्र सरकार ने जस्टिस विवेक रूसिया को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है।
करीब 34 वर्षों के विधिक अनुभव वाले जस्टिस रूसिया ने 8 अगस्त 1992 को वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय प्रभाकर रूसिया एवं स्वर्गीय पी. सदाशिवन नायर के मार्गदर्शन में वकालत की शुरुआत की थी। 7 अप्रैल 2016 को उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
न्यायिक समुदाय को उम्मीद है कि अमित लाहोटी की संभावित नियुक्ति और न्यायालय में रिक्त पदों की पूर्ति से लंबित मामलों के निस्तारण की गति तेज होगी तथा न्याय की राह देख रहे लाखों पक्षकारों को राहत मिलेगी।
