जबलपुर। जिले में शस्त्र लाइसेंस रखने वालों के लिए अब नियम पहले से कहीं अधिक सख्त होने जा रहे हैं। राज्य सरकार ने शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक पांच वर्ष में शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण अनिवार्य होगा और इसके लिए आवेदक को पटवारी की विशेष सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पटवारी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख करेंगे कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ किसी अन्य की भूमि पर अवैध कब्जा या कब्जे के प्रयास का कोई मामला दर्ज है या नहीं। यदि जांच में यह सामने आता है कि आवेदक ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन हड़पने की कोशिश की है, तो उसका शस्त्र लाइसेंस न केवल नवीनीकरण से वंचित किया जा सकता है, बल्कि उसे निरस्त भी किया जा सकता है।
हर स्तर पर होगी कड़ी जांच
प्रशासन के अनुसार, आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत शस्त्र लाइसेंस जारी करने और उसके नवीनीकरण का अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास सुरक्षित है। यदि किसी व्यक्ति का आचरण सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है या सत्यापन के दौरान कोई प्रतिकूल तथ्य सामने आता है, तो जिला प्रशासन लाइसेंस के नवीनीकरण पर तत्काल रोक लगा सकता है।
नई व्यवस्था के तहत पुलिस, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा बहुस्तरीय सत्यापन किया जाएगा। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भूमि कब्जाने वालों पर प्रशासन की नजर
प्रशासन का मानना है कि कई मामलों में प्रभावशाली लोग हथियारों के दम पर विवादित जमीनों पर कब्जा करने या दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। इसी प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए सत्यापन प्रक्रिया में भूमि विवाद और अवैध कब्जे से जुड़े मामलों को विशेष महत्व दिया गया है।
अब यदि किसी आवेदक के खिलाफ इस तरह की शिकायत या प्रकरण सत्यापित होता है, तो उसके लिए शस्त्र लाइसेंस बनाए रखना आसान नहीं होगा।
पुलिस-राजस्व विभाग करेंगे संयुक्त निगरानी
नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे। निर्धारित पात्रता और मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले आवेदकों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि यह पहल न केवल हथियारों के दुरुपयोग पर रोक लगाएगी, बल्कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगी और जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी।
