आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि को आषाढ़ अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि को पितरों के लिए समर्पित माना गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से अत्यंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वहीं, इस बार आषाढ़ी अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का शुभ संयोग भी बन रहा है। ऐसे में आइए जानें आषाढ़ अमावस्या की तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व।
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत खास महत्व है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को आषाढ़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। वहीं, इस बार अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में इस दिन स्नान, दान और पितृ कर्म करना बेहद फलदायी रहेगा। मान्यता है कि आषाढ़ी अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान के बाद दान आदि पुण्य कार्य करने से अनजाने में किए गए पाप कटित होते हैं और जीवन में सुख बढ़ता है। ऐसे में आइए पंडित राकेश झा से विस्तार से जानें की आषाढ़ी अमावस्या कब है, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और इसका महत्व।
आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है ?
पं. राकेश झा बताते हैं कि पंचांग के अनुसार, 13 जुलाई, सोमवार के दिन शाम को 6 बजकर 50 मिनट से अमावस्या तिथि शुरू होगी। वहीं, अगले दिन यानी 14 जुलाई, मंगलवार को शाम के 3 बजकर 14 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। चूंकि, 14 तारीख को दोपहर में भी अमावस्या तिथि लग रही है और इस दिन सुबह के समय से ही अमावस्या तिथि रहेगी। ऐसे में 14 जुलाई के दिन ही आषाढ़ी अमावस्या पड़ रही है। इसी दिन स्नान, दान आदि पुण्य कार्य किए जाएंगे और पितृकर्म भी इसी दिन करना शास्त्रसम्मत होगा।
आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है ?
पं. राकेश झा बताते हैं कि पंचांग के अनुसार, 13 जुलाई, सोमवार के दिन शाम को 6 बजकर 50 मिनट से अमावस्या तिथि शुरू होगी। वहीं, अगले दिन यानी 14 जुलाई, मंगलवार को शाम के 3 बजकर 14 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। चूंकि, 14 तारीख को दोपहर में भी अमावस्या तिथि लग रही है और इस दिन सुबह के समय से ही अमावस्या तिथि रहेगी। ऐसे में 14 जुलाई के दिन ही आषाढ़ी अमावस्या पड़ रही है। इसी दिन स्नान, दान आदि पुण्य कार्य किए जाएंगे और पितृकर्म भी इसी दिन करना शास्त्रसम्मत होगा।
आषाढ़ अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्तआषाढ़ अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त
आषाढ़ी अमावस्या के दिन स्नान, दान आदि कार्यों के लिए सुबह 4 बजकर 30 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट का समय उत्तम रहेगा। वहीं, पितृकर्म दोपहर के समय करने का विधान बताया गया है।
आषाढ़ अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का संयोग
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि सुबह से लेकर दोपहर तक 14 जुलाई को व्याप्त रहेगी। इस दिन मंगलवार पड़ रहा है और जब अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है तो उसे भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यही कारण है कि इस बार आषाढ़ अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का बेहद शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन दोपहर के समय पितृकर्म किए जाते हैं।
आषाढ़ी अमावस्या के दिन स्नान, दान आदि कार्यों के लिए सुबह 4 बजकर 30 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट का समय उत्तम रहेगा। वहीं, पितृकर्म दोपहर के समय करने का विधान बताया गया है।
आषाढ़ अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का संयोग
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि सुबह से लेकर दोपहर तक 14 जुलाई को व्याप्त रहेगी। इस दिन मंगलवार पड़ रहा है और जब अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है तो उसे भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यही कारण है कि इस बार आषाढ़ अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का बेहद शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन दोपहर के समय पितृकर्म किए जाते हैं।
