मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा का चुनाव बड़ा ही दिलचस्प हो चला है. सत्तारूढ़ पार्टी में उम्मीदवार को लेकर बगावत खुलकर सड़क पर आई तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने दतिया के राज परिवार पर दांव लगाया है. कांग्रेस ने धनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है. 18 साल बाद दतिया से एक बाद फिर चुनावी मैदान में उतरे घनश्याम सिंह अपनी जीत को लेकर कुछ ज्यादा ही आश्वस्त हैं। उनका ये भरोसा 2008 में चुनाव में पटखनी देने वाले नरोत्तम मिश्रा और टिकट कटने से पार्टी के भीतर पैदा हुए बगावती माहौल पर है. TV9 भारतवर्ष से बात करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने से चुनाव और आसान हो गया है. लेकिन नरोत्तम मिश्रा को चुनाव हराते तो ज्यादा अच्छा लगता, लड़ाई में मजा भी आता.
आशुतोष तिवारी को आप कितनी बड़ी चुनौती मानते हैं?
धनश्याम सिंह ने कहा ये बहुत ही कम चुनौती है. कोई खास चुनौती नहीं है. क्योंकि उनको कोई जानता नहीं है. जिले में कभी काम नहीं किया, यहां कभी आना जाना नहीं रहा, दतिया ग्रामीण क्षेत्र में तो कोई उनको नाम से भी नहीं जानता. उन्होंने 2023 में शेवडा से टिकट मांगा था लेकिन मिल नहीं पाया था. शेहवा से लड़ने का इरादा था तो उन्होंने अपने मौसी के लड़के सुरेंद्र भदौरिया को जिला भाजपा अध्यक्ष बनवा दिया था. नरोत्तम मिश्रा से मिलकर, दोनों मिल गए थे. उन्होंने इसलिए बनवाया था कि 2/3 साल में अच्छी फिल्डिंग जमा देंगा. अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग बीजेपी अध्यक्ष के कहने से होती है. फिर बाद में टिकट मांगूगा ये उनका सिक्रेट प्लान था. लेकिन जिला अध्यक्ष ने जमीनों पर कब्जा करने का काम किया, लोगों को पता चला तो आशुतोष तिवारी की फील्ड बनने की जगह खराब होती चली गई.
उपचुनाव में टिकट बदलने की वजह क्या थी ?
वजह ये थी कि भारती जी तो डिसक्वालिफाई हो गए थे. वो केस लड़ रहे थे उसमें उनकी एनर्जी बहुत वेस्ट हुई. तो उन्होंने दिल्ली में सीनियर नेताओं से मिलकर कहा कि मेरे स्वास्थ्य के हिसाब से और जो पारिवारिक स्थिति है, बहुत मानसिक दवाब में हैं. इसलिए मेरे परिवार में कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा. धनश्याम सिंह ने दावा किया कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट इसलिए कटा क्योंकि भारतीय जनता पार्टी में अंतर्कलह है.
नरोत्तम मिश्रा स्ट्रॉन्ग और कद्दावर पर्सनेलिटी हैं. तो उनसे ऊपर बैठे लोगों और मोहन यादव को भी खतरा था कि अगर जीतकर आ गए तो कैबिनेट मंत्री तो बनना है. मुख्यमंत्री बनने की भी दावेदारी करेंगे. भाजपा के दूसरे सीनियर नेताओं को ही था कि यहां एक और सीनियर नेता यहां क्यों आए जाए. अगर ये हार गया है तो इसको नीचे ही रहने दो. कई बार राजनीति में होता है कि जो ज्यादा चतुर चालाक, योग्य या सक्षम होता है. उसका इसलिए विरोध होता है. यही हुआ नरोत्तम मिश्रा जी के साथ.
नरोत्तम मिश्रा के समर्थक आपको चुनाव जीताने में मदद करेंगे?
धनश्याम सिंह ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा बहुत अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं. उनको जो करना होगा वो करेंगे. राजनीति में कुछ भी हो सकता है. इतनी चोट खाने के बाद ऐसा कद्दावर नेता. सहन कर जाए तो बहुत मुश्किल होता है. चोट जब पहुंचती है तो आदमी दिल में सहन नहीं कर पाता. अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा मिलना चाहिए.
मैंने उनसे कभी संपर्क नहीं किया, लेकिन उनके जो लोग हैं. वो हमसे संपर्क कर रहे हैं और कह रहे हैं कि अब तो नरोत्तम मिश्रा जी भी अगर ऊपर के दबाव में मान गए और हमसे कहेंगे कि नहीं भाजपा का ही करना है तो हम तो नहीं करेंगे. हम निर्माण ले चुके आपका ही करेंगे, बहुत से लोगों ने संपर्क करके कहा.
दतिया में डैमेज कंट्रोल के लिए उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को मैदान में उतरना पड़ा है, क्या डेमेज कंट्रोल हो गया है? कल नरोत्तम मिश्रा मोहन यादव जी से भी मिले थे. मैंने आपको बताया कि वो बहुत कद्दावर नेता हैं. पार्टी से निष्कासित तो होंगे नहीं, लेकिन आशुतोष तिवारी को जीतने नहीं देंगे. अपने ढंग से देखने दिखाने के लिए काम करेंगे. लेकिन लोग जा रहे हैं. उसका फायदा मिलेगा. धनश्याम सिंह ने कहा कि मेरी और पार्टी की जीत निश्चित है. नरोत्तम मिश्रा जी देखने दिखाने के लिए वहीं रहेंगे लेकिन लोग खिसकर इधर आ जाएंगे.
