जबलपुर। बरगी क्रूज दुर्घटना की जांच में एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ आया है। जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी ने हादसे से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने दुर्घटनाग्रस्त क्रूज के इंजन, जनरेटर और अन्य महत्वपूर्ण अवशेषों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर रखने का आदेश देते हुए बरगी के तहसीलदार से जवाब तलब किया है कि पूर्व में अनुमति मिलने के बावजूद अब तक साक्ष्यों का संरक्षण क्यों नहीं किया गया।
आयोग के समक्ष नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव और एडवोकेट वेदप्रकाश अधोलिया ने शिकायत प्रस्तुत करते हुए कहा कि आयोग के पहले के निर्देशों के बावजूद हादसे से जुड़े अहम साक्ष्यों को सुरक्षित नहीं रखा गया। उनका आरोप था कि जांच पूरी होने से पहले ही क्रूज को तोड़ दिया गया, जिससे उसकी फिटनेस और तकनीकी क्षमता का निष्पक्ष परीक्षण लगभग असंभव हो गया।
आयोग के आदेशों की अनदेखी पर सवाल
मंच ने 26 जून 2026 को आयोग के समक्ष याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि जिम्मेदार अधिकारियों ने आयोग की अनुमति और निर्देशों की अनदेखी की। इससे पहले 15 जून को दिए गए बयान में यह भी कहा गया था कि इनलैंड वेसल एक्ट, 2021 की धारा 75(5) का उल्लंघन करते हुए क्रूज को डिसमेंटल किया गया, जिससे संभावित तकनीकी खामियों को छिपाने का प्रयास किया गया। आयोग ने इन आरोपों को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की गंभीरता स्वीकार की है।
बढ़ते जलस्तर से साक्ष्य मिटने का खतरा
मंच ने आयोग को यह भी अवगत कराया कि बरगी बांध का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यदि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज के शेष अवशेष समय रहते सुरक्षित नहीं किए गए, तो वे जलमग्न होकर नष्ट हो सकते हैं। इससे हादसे की वास्तविक वजहों तक पहुंचना और दोष तय करना कठिन हो जाएगा।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ताओं ने साक्ष्यों को सुरक्षित न रखने और उनके नष्ट होने की आशंका को गंभीर आपराधिक लापरवाही बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। आयोग ने तहसीलदार को निर्देशित किया है कि वह तत्काल साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और यह स्पष्ट करें कि आयोग के पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
अब इस मामले में आयोग की अगली सुनवाई और प्रशासन द्वारा प्रस्तुत जवाब पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि बरगी क्रूज हादसे की जांच में साक्ष्यों का संरक्षण ही आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
