उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन अब केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आधुनिक आपदा प्रबंधन तकनीकों का भी नया मॉडल बनने जा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच नगर निगम ने शहर की अग्निशमन व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई व्यवस्था में ड्रोन, रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे आग लगने की स्थिति में राहत और बचाव कार्य पहले से कहीं अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगा।
नगर निगम के मुताबिक शहर की संकरी गलियां, घाट क्षेत्र और लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या को देखते हुए यह आधुनिक फायर सिस्टम विकसित किया जा रहा है। निजी कंपनी की मदद से तैयार हो रही यह तकनीक भविष्य में देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।
ड्रोन करेंगे निगरानी, रोबोट संभालेंगे जोखिम वाले इलाके
नई फायर सेफ्टी व्यवस्था के तहत आग लगने की सूचना मिलते ही ड्रोन घटनास्थल का हवाई सर्वे करेंगे और वास्तविक स्थिति की जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचाएंगे। वहीं, रोबोट उन स्थानों पर पहुंचकर कार्रवाई करेंगे जहां इंसानी जान को खतरा हो सकता है। पूरी व्यवस्था AI आधारित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से संचालित होगी, जो घटनास्थल का विश्लेषण कर अधिकारियों को त्वरित निर्णय लेने में मदद करेगा।
सिंहस्थ-2028 के लिए तैयार होगा सुरक्षा कवच
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने बताया कि सिंहस्थ महाकुंभ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना रहती है। इतनी विशाल भीड़ के बीच पारंपरिक अग्निशमन व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए टेक्नोलॉजी आधारित फायर रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में कुछ ही मिनटों में राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
संकरी गलियों तक पहुंचेगी हाईटेक फायर टीम
योजना के तहत संकरी गलियों, घाट मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के लिए विशेष ऑल-टेरेन व्हीकल (ATV) और क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल (QRV) तैनात किए जाएंगे। इन वाहनों में अत्याधुनिक कम्प्रेस्ड एयर फोम सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे आग पर तेजी से काबू पाया जा सकेगा। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि ये तंग रास्तों में भी आसानी से पहुंचकर आग को फैलने से रोक सकेंगे।
देश के लिए बनेगा नया मॉडल
नगर निगम का मानना है कि यह हाईटेक फायर सिस्टम न केवल सिंहस्थ-2028 के दौरान सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि सामान्य दिनों में भी शहर के संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में प्रभावी आपदा प्रबंधन सुनिश्चित करेगा। सफल होने पर उज्जैन का यह मॉडल देश के अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
