वेतन विसंगति का शर्मनाक खुलासा: सीनियर शिक्षकों की तनख्वाह जूनियर्स से भी कम

 


जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर संभाग में शिक्षकों के साथ गंभीर अन्याय सामने आया है। यहां अपने ही बनाए ‘संभागीय नियमों’ पर चलते हुए विभाग ने 369 पदोन्नत शिक्षकों को उनका वैधानिक हक  यानी द्वितीय क्रमोन्नतिसे वंचित कर दिया है। स्थिति यह है कि उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर पदोन्नति मिल चुकी है, फिर भी उन्हें अपने जूनियर शिक्षकों से कम वेतन दिया जा रहा है। यह पूरा मामला तत्कालीन संयुक्त संचालक कार्यालय की मनमानी और नियमों की गलत व्याख्या का नतीजा बताया जा रहा है।

-बाकी संभागों के हाल

सबसे बड़ी विसंगति यह है कि प्रदेश के अन्य संभाग भोपाल, इंदौर, सागर, रीवा सभी जगह पिछले वर्ष ही द्वितीय क्रमोन्नति आदेश जारी कर दिए गए, लेकिन जबलपुर संभाग में आदेश रोक दिए गए। संयुक्त संचालक कार्यालय का दावा है कि एक पदोन्नति के साथ एक क्रमोन्नति मिल चुकी है, इसलिए दूसरी क्रमोन्नति नहीं दी जा सकती। जबकि शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि पदोन्नति में उन्हें उच्चतर वेतनमान मिला ही नहीं, यह उनकी सर्विस बुक में भी दर्ज है। कुछ को गलती से मिला भी, तो बाद में विभाग ने रिकवरी करके पैसा वापस ले लिया।

-क्या है अतीत की कहानी

1998 में शिक्षाकर्मी वर्ग 2 के रूप में नियुक्त शिक्षकों को 2007 में अध्यापक संवर्ग मिला, 2010 में पहली क्रमोन्नति दी गई, 2011–15 के बीच उन्हें वरिष्ठ अध्यापक बना दिया गया—लेकिन वेतनमान रोक दिया गया। 2022 में 24 वर्ष सेवा पूर्ण होने के बावजूद आज तक द्वितीय क्रमोन्नति नहीं मिली, जिसके चलते हर शिक्षक को लगभग ₹4,000 प्रति माह का नुकसान हो रहा है। अप्रैल 2025 में मार्गदर्शन के लिए मामला लोक शिक्षण आयुक्त तक भेजा गया था। आयुक्त ने तीन सदस्यीय समिति जरूर बनाई, लेकिन 6 माह बाद भी एक पंक्ति का जवाब नहीं मिला। अब नए संयुक्त संचालक के कार्यभार संभालने के बाद शिक्षकों में हल्की उम्मीद जागी है।

-यह विसंगति कैसे बनी?

पदोन्नति में उच्चतर वेतनमान नहीं दिया गया

संयुक्त संचालक ने एक पदोन्नति, एक क्रमोन्नति0वाली व्याख्या लागू कर दी

सर्विस बुक का रिकॉर्ड नजरअंदाज

दूसरे संभागों में लाभ दे दिया गया, जबलपुर में रोक

विभागीय समिति 6 महीने से जवाब नहीं दे रही

-- शिक्षकों का सीधा नुकसान

संभाग में 369 प्रभावित शिक्षक 

हर शिक्षक को करीब ₹4,000 मासिक नुकसान

2 साल में औसतन ₹1 लाख की आर्थिक हानि

जूनियर शिक्षक सीनियर से ज्यादा वेतन ले रहे

आर्थिक, मानसिक और करियर ग्रोथ—तीनों पर असर


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