भोपाल में चार अलग-अलग थाना क्षेत्रों में फांसी लगाकर आत्महत्या, किसी भी मामले में सुसाइड नोट नहीं

 


भोपाल। राजधानी भोपाल में एक ही दिन में चार अलग-अलग थाना क्षेत्रों से फांसी लगाकर आत्महत्या के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में एक छात्रा, एक डिलीवरी बॉय और दो अन्य युवक शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि चारों मामलों में मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने सभी मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

19 वर्षीय छात्रा ने घर में लगाई फांसी
कोलार थाना क्षेत्र के बावड़ी उमर क्षेत्र में 19 वर्षीय नीतिपुत्रा आलम निवासी छात्रा ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में फर्स्ट ईयर की छात्रा थी। पिता राम सिंह पाररे के अनुसार, बेटी और उसका भाई एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। जब कमरे का दरवाजा खोला गया तो बेटी का शव पंखे से लटका मिला। पुलिस और एफएसएल टीम ने मौके का मुआयना किया, लेकिन आत्महत्या के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो सका है।

मानसिक तनाव से जूझ रहे डिलीवरी बॉय ने दी जान
बारसेनिया थाना क्षेत्र के अमराई झुग्गी इलाके में रहने वाले 25 वर्षीय दिनेश अहिरवार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह एक निजी कंपनी में डिलीवरी बॉय के तौर पर काम करता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दिनेश पिछले एक साल से मानसिक अस्थिरता से जूझ रहा था और उसका इलाज भी चल रहा था। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

शराब की लत से परेशान युवक की मौत
खजूरी सड़क थाना क्षेत्र के फंदा गांव में 26 वर्षीय अजय मालवीय ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक पेशे से मजदूर था। परिजनों के अनुसार, वह अत्यधिक शराब पीने का आदी था, जिससे वह अक्सर परेशान रहता था। पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम कराया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

40 वर्षीय युवक ने भी फांसी लगाकर की आत्महत्या
बैरागढ़ थाना क्षेत्र में 40 वर्षीय बाबू ने फांसी लगाकर जान दे दी। परिजन उसे हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। इस मामले में भी कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

फिलहाल चारों मामलों में पुलिस आत्महत्या के कारणों की अलग-अलग जांच कर रही है। एक साथ सामने आए इन मामलों ने राजधानी में मानसिक तनाव, सामाजिक दबाव और नशे की समस्या पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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