जमानत याचिका खारिज: हाईकोर्ट ने यासीन मछली मामले में अपनाया सख्त रुख




भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बहुचर्चित यासीन मछली मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी यासीन अहमद उर्फ मछली की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता, आरोपी के काले कारनामों के लंबे रिकॉर्ड और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी पर फर्जी पत्रकार बनकर मध्य प्रदेश विधानसभा पास का दुरुपयोग करने, सत्ता और सुरक्षा का झूठा रौब दिखाने, युवतियों के यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण जैसे संगीन आरोप हैं। ऐसे में आरोपी को जमानत देना समाज और गवाहों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।

फर्जी पत्रकार बनकर घूम रहा था आरोपी

पूरा मामला तब सामने आया जब यासीन मछली को अपनी कार पर मध्य प्रदेश विधानसभा का फर्जी पास लगाकर घूमते हुए पकड़ा गया। यह पास दिसंबर 2024 में विधानसभा सत्र के दौरान एक पत्रकार के नाम पर जारी किया गया था। असली पत्रकार की शिकायत पर भोपाल के ऐशबाग थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी इस फर्जी पास का इस्तेमाल सत्ता और सुरक्षा का भ्रम पैदा करने के लिए कर रहा था।

ड्रग्स, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण का जाल

पुलिस जांच में यासीन के खिलाफ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरोपी और उसके चाचा शाहवर को पूर्व में भारी मात्रा में ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है। यासीन के मोबाइल से कई आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए, जिनमें वह स्कूल-कॉलेज की छात्राओं को पार्टियों के बहाने नशीले पदार्थ देने, फिर उनका शोषण कर वीडियो बनाने और बाद में ब्लैकमेल करने की करतूतों में शामिल पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी वीडियो के जरिए युवतियों पर धर्मांतरण का दबाव बनाता था।

अदालत ने माना समाज के लिए खतरा

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यदि ऐसे आदतन अपराधी को जमानत दी जाती है तो वह न सिर्फ समाज, बल्कि पीड़ितों और गवाहों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है। हाईकोर्ट ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि आरोपी का आपराधिक इतिहास और अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है, इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट के इस फैसले को कानून-व्यवस्था और समाज की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है, जिससे यह संदेश गया है कि गंभीर अपराधों में लिप्त लोगों के प्रति न्यायालय कोई नरमी नहीं बरतेगा।

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