मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: ‘केरल’ अब होगा ‘केरलम’, भाषाई अस्मिता को मिली नई पहचान

 



नई दिल्ली। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित नवनिर्मित पीएमओ बिल्डिंग ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई बैठक में मोदी कैबिनेट ने Kerala राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

यह प्रस्ताव राज्य के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan द्वारा केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ ही कहा जाता है और ऐतिहासिक रूप से भी यही नाम प्रचलित रहा है।

स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी है मांग

मुख्यमंत्री विजयन ने अपने प्रस्ताव में उल्लेख किया था कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही मलयालम भाषी समुदायों के लिए एक एकीकृत ‘केरलम’ की अवधारणा रही है। उनका तर्क था कि राज्य की पहचान उसकी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी होनी चाहिए।

हालांकि, भारतीय संविधान की पहली अनुसूची में अब तक राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है। केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति के बाद अब इसे बदलने की औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें संसद की मंजूरी भी आवश्यक होगी।

आठवीं अनुसूची में भी होगा संशोधन

मुख्यमंत्री का मुख्य आग्रह यह था कि केंद्र सरकार न केवल आधिकारिक दस्तावेजों में, बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ किया जाए।

इस फैसले को राज्य की भाषाई अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय संघीय ढांचे में राज्यों की भाषाई पहचान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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