कुत्तों की नसबंदी में बड़ा फर्जीवाड़ा, रतलाम निगम से संभागायुक्त ने मांगा जवाब



रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में कुत्तों के बधियाकरण में नगर निगम के अफसरों द्वारा किया गया भ्रष्टाचार का मामला गहराता जा रहा है। रिकॉर्ड क्रॉस चेक करने के साथ ही पूछताछ का प्रारंभिक दौर खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि इसमें कई चौंकाने वाले आंकड़े पकड़ में आए हैं। लोकायुक्त की जांच के बीच अब संभागायुक्त ने कमिश्नर अनिल भाना से जवाब (अभिमत) मांगा है। नोटिस में साफ कहा है कि कुत्ता बधियाकरण में भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, इस संबंध में पूरी रिपोर्ट बनाकर दें। संभागायुक्त का नोटिस आने के बाद लगभग एक माह से ठंडे पड़े कुत्ता बधियाकरण में भ्रष्टाचार के मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है। इसकी पूरी शिकायत पार्षद ने की है कुत्तों के लगातार काटने की घटना सामने आने के बाद वार्ड एक की कांग्रेस पार्षद भावना पैमाल ने 6 नवंबर वार्ड 1 की कांग्रेस पार्षद ने की थी शिकायत, परिषद सम्मेलन में उठाया था मामला।

यह है मामला

2022 से मई 2025 तक 2 प्राइवेट फर्मों ने 33,630 कुत्तों के बधियाकरण का दावा करते हुए 2.64 करोड़ रुपए के बिल लगाए थे। जिम्मेदारों ने बिना फिजिकल वेरिफिकेशन किए 2.29 करोड़ रुपए फर्मों को दे दिए। वार्ड एक की पार्षद भावना की शिकायत के बाद लोकायुक्त उज्जैन पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। 26 दिसंबर को लोकायुक्त पुलिस निगम अधिकारी और पार्षद से पूछताछ कर चुकी है। निगम से लिए गए रिकॉर्ड की चेकिंग भी चल रही है।

पार्षद पति और कांग्रेस नेता हितेश पेमल ने कहा कि गंभीरता से जांच होनी चाहिए करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद कुत्तों की संख्या कम नहीं हुई है। बधियाकरण में हर बार अलग-अलग प्रति कुत्ता 636 से 907 रुपए खर्च किए गए। सारा खेल इसी आंकड़े के बूते खेला गया है। गंभीरता से जांच होना चाहिए। इस सब घोटाले में पशु चिकित्सा विभाग के डॉ और प्रभारी के अलावा मुख्य भूमिका पूर्व के आयुक्त और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं, जिनका ट्रांसफर हो चुका है।
36 लाख रुपए का भुगतान करने की तैयारी थी

पार्षद की शिकायत के बाद कुत्ता बधियाकरण में हुआ कथित भ्रष्टाचार का मामला खुल गया, वरना निगम के अफसरों ने बाकी के करीब 36 लाख रुपए के बिल का भुगतान करने की तैयारी कर ली थी। दरअसल अब तक निगम ने सिर्फ 2 निजी फर्मों से ही कुत्तों का बधियाकरण करवाया है। संतुलन जीव कल्याण को 3 बार में लगभग 1.52 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। वहीं फरवरी 2024 से मई 2025 तक द केयर ऑफ एनिमल एंड सोसायटी फर्म 5 बार यह काम कर चुकी है। इसे 76.44 लाख का भुगतान हो चुका है, जबकि लगभग 36 लाख रुपए का भुगतान रुका हुआ है इसके आसपास की बातें तो नगर निगम के वर्तमान स्वास्थ्य अधिकारी राजेंद्र सिंह भी स्वीकारते हैं पर खुलकर कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। बताया जा रहा है कि लोकायुक्त की जांच में भी अब तक बधिया किए गए कुत्तों का फिजिकल वेरिफिकेशन का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

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