जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) में जारी विवादों और प्रशासनिक खींचतान के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) प्रो. विवेक मिश्रा ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम ने विश्वविद्यालय के अंदर चल रही खामोश टकराहट को सार्वजनिक बहस में ला दिया है।
प्रो. मिश्रा ने 16 मार्च को कुलगुरु को संबोधित अपने त्यागपत्र में साफ तौर पर लिखा है कि हाल के घटनाक्रम और विश्वविद्यालय प्रशासन के “नकारात्मक रवैये” के चलते उनके लिए पद पर बने रहना संभव नहीं रह गया था। उन्होंने अपने आत्मसम्मान का हवाला देते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया।
लेकिन इस इस्तीफे के साथ विवाद थमा नहीं, बल्कि और गहरा गया। आरडीयू प्रशासन ने प्रो. मिश्रा को एक और नोटिस जारी करते हुए त्यागपत्र में लगाए गए आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा है। यानी सवाल अब सिर्फ इस्तीफे का नहीं, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप के उस सिलसिले का है जो विश्वविद्यालय की साख पर भी असर डाल सकता है।
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो छात्र मामलों से जुड़े कई मुद्दों पर डीएसडब्ल्यू कार्यालय और प्रशासन के बीच लंबे समय से तालमेल की कमी बनी हुई थी। विशेष रूप से युवा उत्सव के आयोजन में सामने आई अव्यवस्थाओं ने इस खाई को और चौड़ा कर दिया। मामला तब और गंभीर हो गया जब इन अव्यवस्थाओं को लेकर विधानसभा में सवाल उठे और उसके बाद प्रो. मिश्रा को शोकाज नोटिस थमाया गया।
यही वह पृष्ठभूमि है, जिसमें यह इस्तीफा सामने आया है जो महज एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के भीतर चल रही असहमति और अव्यवस्था की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सवाल कई हैं
क्या यह इस्तीफा दबाव का परिणाम है?
क्या विश्वविद्यालय में संवाद की जगह टकराव ने ले ली है?
और सबसे बड़ा सवाल क्या इसका असर छात्रों और शैक्षणिक माहौल पर पड़ेगा?
