चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। सुनहरी आभा और माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करने वाली देवी को दूध और उससे बनी मिठाइयां अत्यंत प्रिय हैं। मान्यता है कि इस दिन मखाने की खीर का भोग लगाने से घर में सुख-शांति आती है और शुक्र ग्रह दोष दूर होते हैं।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप
शास्त्रों के अनुसार माँ चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी है। उनकी पूजा में दूध को प्रधानता दी गई है। यही कारण है कि भक्त इस दिन खीर, रबड़ी या दूध से बनी मिठाइयों का नैवेद्य अर्पित करते हैं। इनमें मखाना खीर न केवल शुद्ध और सात्विक है बल्कि उपवास के दौरान ऊर्जा का भी बेहतरीन स्रोत मानी जाती है।
झटपट तैयार करें मखाना खीर
यदि आप घर पर ही शुद्ध भोग तैयार करना चाहते हैं तो मखाना खीर एक बेहतरीन विकल्प है। इसे बनाने की विधि सरल और समय बचाने वाली है।
सामग्री
2 कप फूल मखाने, 1 लीटर फुल क्रीम दूध, आधा कप चीनी (या स्वादानुसार), 10-12 कटे हुए बादाम-काजू, आधा चम्मच इलायची पाउडर और थोड़े से केसर के धागे।
विधि
- सबसे पहले एक भारी तले वाली कड़ाही में थोड़ा सा घी डालें और मखानों को हल्का कुरकुरा होने तक भून लें। भुने हुए मखानों में से आधे को दरदरा कूट लें और बाकियों को साबुत रहने दें।
- एक गहरे बर्तन में दूध को तब तक उबालें जब तक वह थोड़ा गाढ़ा न हो जाए। अब इसमें भुने हुए मखाने और केसर डाल दें।
- जब मखाने नरम हो जाएं और दूध गाढ़ा दिखने लगे, तब इसमें चीनी और इलायची पाउडर मिलाएं। अंत में कटे हुए मेवों से सजाकर माँ को गरमा-गरम या ठंडी खीर का भोग लगाएं।
धार्मिक और स्वास्थ्य लाभ
धार्मिक दृष्टि से मखाना चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है और माँ चंद्रघंटा के पूजन में इसका उपयोग मानसिक शांति प्रदान करता है। वहीं सेहत के लिहाज से मखाना लो-कैलोरी और हाई-प्रोटीन होता है जो व्रत में दिनभर आपको सक्रिय रखता है।
रखें ध्यान
तीसरे दिन की पूजा में मां को भोग लगाने के बाद इस प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटना चाहिए। ध्यान रहे कि मखाना खीर बनाते समय केवल सेंधा नमक (यदि आवश्यक हो, हालांकि मीठे में जरूरत नहीं होती) और सात्विक बर्तनों का ही प्रयोग करें। मां चंद्रघंटा की कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर होंगे और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
