मिडिल ईस्ट संकट का असर: गैस-तेल की किल्लत के बीच सरकार का बड़ा फैसला, PNG वाले उपभोक्ताओं पर सख्ती



नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संभावित युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर गैस और तेल आपूर्ति पर संकट गहराता जा रहा है। इसका असर भारत पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। जानकारों का मानना है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित नहीं होता, तब तक ईंधन आपूर्ति पर दबाव बना रह सकता है।

इसी बीच देश में एलपीजी गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जहां पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां के उपभोक्ताओं को अब एलपीजी सिलेंडर नहीं दिया जाएगा, यदि वे PNG का उपयोग नहीं करते हैं।

PNG होते हुए भी LPG रखने वालों पर कार्रवाई

सरकार के मुताबिक, कई ऐसे उपभोक्ता हैं जिनके घर तक PNG पाइपलाइन पहुंच चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वे एलपीजी सिलेंडर भी रखे हुए हैं। गैस एजेंसियों द्वारा ऐसे उपभोक्ताओं को कई बार अलर्ट भेजे गए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अब आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को 3 महीने के भीतर PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनकी एलपीजी सप्लाई बंद कर दी जाएगी।

दोहरे कनेक्शन पर भी सख्ती

जिन उपभोक्ताओं के पास PNG और LPG दोनों कनेक्शन हैं, उन्हें एक विकल्प चुनना होगा। सरकार ने संकेत दिए हैं कि ऐसे लोगों को अतिरिक्त एलपीजी सिलेंडर जमा कराना पड़ेगा, ताकि जरूरतमंद उपभोक्ताओं को गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

देशभर में करोड़ों उपभोक्ता प्रभावित

आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 33.05 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं, जबकि PNG कनेक्शनधारियों की संख्या लगभग 1 करोड़ 57 लाख है। राजधानी दिल्ली में ही लाखों ऐसे परिवार सामने आए हैं, जिनके पास दोनों सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर नहीं किया है।

सरकार का मकसद क्या?

सरकार का यह कदम गैस नेटवर्क के विस्तार को बढ़ावा देने और एक ही ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही, कमर्शियल गैस सप्लाई पर बढ़ते दबाव को भी कम करने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में ईंधन संकट और गहरा सकता है। ऐसे में सरकार के ये फैसले आपूर्ति संतुलन बनाए रखने के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।

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