जबलपुर। न्यायपालिका से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को कोर्ट में पेश हुए विधायक की अगली पेशी से छूट की मांग को अदालत ने सख्ती से खारिज कर दिया। अब उन्हें 14 मई को भी अनिवार्य रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा।
क्या है पूरा मामला
मामला 1 सितंबर 2025 को सामने आया था, जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि विधायक संजय पाठक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की थी। इसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास मानते हुए जस्टिस मिश्रा ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया और केस को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया।
कोर्ट में आज क्या हुआ
मंगलवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर आशुतोष दीक्षित को मामले में सहायता करने की अनुमति दी और अगली सुनवाई की तारीख 14 मई तय की।
पेशी से छूट की मांग खारिज
विधायक संजय पाठक ने अगली पेशी से छूट की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मामला विचाराधीन है, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
इंटरवेंशन एप्लीकेशन पर रुख
व्हिसलब्लोअर आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामद और राजेंद्र सिंह ने इंटरवेंशन एप्लीकेशन दायर करने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने औपचारिक आवेदन देने से मना करते हुए उन्हें मौखिक रूप से सहायता करने की अनुमति दी।
माफी के बावजूद सख्ती
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में संजय पाठक ने बिना शर्त माफी भी मांगी थी, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट इस मामले में पहले ही आपराधिक अवमानना का केस दर्ज कर चुका है।
खनन विवाद से जुड़ा मामला
पूरा प्रकरण विधायक पाठक के परिवार से जुड़ी खनन कंपनियों के कथित अवैध उत्खनन से जुड़ा हुआ है, जिसकी सुनवाई पहले जस्टिस मिश्रा की बेंच में चल रही थी।
